महिलाओं को सशक्त बनाने में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण
NREGA Job Card सशक्त बनाने में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण और विविधतापूर्ण देश में ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति लंबे समय तक चुनौतियों से घिरी रही है। ऐसे परिदृश्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। वर्ष 2005 में लागू यह कानून प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष कम से कम 100 दिनों का अकुशल मजदूरी रोजगार देने की गारंटी प्रदान करता है। इस योजना ने महिलाओं को न केवल आर्थिक स्वतंत्रता दी है, बल्कि सामाजिक सम्मान और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ाई है।
आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
जॉब कार्ड में रोजगार का इतिहास सुरक्षा को सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि इसने महिलाओं को अपने गाँव में ही रोजगार उपलब्ध कराया। पहले महिलाओं को काम के लिए शहरों की ओर पलायन करना पड़ता था या वे पूरी तरह परिवार के पुरुष सदस्यों पर निर्भर रहती थीं
नियमित मजदूरी मिलने से महिलाओं की आय में वृद्धि हुई। बैंक खातों में सीधे भुगतान से वित्तीय समावेशन बढ़ा। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में उनकी भागीदारी मजबूत हुई आर्थिक स्वतंत्रता ने महिलाओं में आत्मविश्वास को बढ़ाया और उन्हें परिवार की आय में योगदानकर्ता के रूप में पहचान दिला।

सामाजिक स्थिति में सुधार
मनरेगा में महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई भागीदारी सुनिश्चित की गई है, हालांकि कई राज्यों में यह प्रतिशत 50% से अधिक है। इससे ग्रामीण समाज में महिलाओं की कार्यस्थल पर उपस्थिति सामान्य और स्वीकार्य बनी है।
- समान मजदूरी का प्रावधान लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है।
- कार्यस्थल पर सामूहिक भागीदारी से सामाजिक जुड़ाव बढ़ा।
- घरेलू निर्णयों में महिलाओं की भूमिका मजबूत हुई।
अब महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामुदायिक विकास कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
वित्तीय समावेशन और बैंकिंग पहुंच
मनरेगा के अंतर्गत मजदूरी का भुगतान सीधे बैंक या डाकघर खातों में किया जाता है। इससे महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने का अवसर मिला।
- बड़ी संख्या में महिलाओं के जन-धन खाते खुले।
- बचत की आदत विकसित हुई।
- डिजिटल भुगतान प्रणाली से परिचय हुआ।
यह परिवर्तन ग्रामीण महिलाओं को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में सहायक सिद्ध हुआ है।
कौशल और नेतृत्व विकास
मनरेगा केवल मजदूरी प्रदान करने तक सीमित नहीं है; यह महिलाओं में नेतृत्व क्षमता भी विकसित करता है।
- ग्राम सभाओं में भागीदारी बढ़ी।
- स्थानीय परियोजनाओं की निगरानी में भूमिका मिली।
- पंचायत स्तर पर नेतृत्व के अवसर प्राप्त हुए।
इस प्रक्रिया ने महिलाओं को सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
पलायन में कमी और पारिवारिक स्थिरता
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध होने से पुरुषों का शहरों की ओर पलायन कम हुआ है। इससे परिवार एकजुट रहे और महिलाओं पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ कम हुआ। परिवार की आय में स्थिरता आई और बच्चों की शिक्षा तथा स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
चुनौतियाँ और सुधार की आवश्यकता
हालांकि मनरेगा ने महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं:
- समय पर भुगतान में देरी
- कार्यस्थल पर बाल देखभाल सुविधाओं की कमी
- जागरूकता का अभाव
- तकनीकी प्रशिक्षण की सीमित उपलब्धता
FAQs
निष्कर्ष
मनरेगा ने ग्रामीण भारत की महिलाओं के जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन की नींव रखी है। इस योजना ने उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक सम्मान और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान की है। आज कई महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं, जो उनके आत्मविश्वास और पहचान को मजबूत करता है।
भविष्य में यदि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, समयबद्ध भुगतान और प्रशिक्षण सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो यह महिलाओं के सशक्तिकरण का और भी प्रभावी माध्यम बन सकती है। मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का सशक्त साधन है।