महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम NREGA
NREGA Job Card राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम NREGA और विविधतापूर्ण देश में ग्रामीण विकास आर्थिक प्रगति की रीढ़ है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, बुनियादी सुविधाएँ और स्थायी परिसंपत्तियाँ (assets) विकसित करना लंबे समय से एक चुनौती रहा है। इन्हीं चुनौतियों का समाधान करने के उद्देश्य से वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA), जिसे प्रायः मनरेगा कहा जाता है, लागू किया गया। यह योजना न केवल ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराती है, बल्कि ग्रामीण अवसंरचना के निर्माण और सुदृढ़ीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
NREGA का उद्देश्य और स्वरूप
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम दिनों का अकुशल श्रम आधारित रोजगार सुनिश्चित करना है। यह एक अधिकार-आधारित योजना है, जिसमें कार्य की मांग करने पर ग्राम पंचायत को निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है। यदि समय पर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी है। इस योजना की खास बात यह है कि इसके अंतर्गत किए जाने वाले कार्य सीधे ग्रामीण अवसंरचना के विकास से जुड़े होते हैं, जैसे

ग्रामीण अवसंरचना विकास में NREGA की भूमिका
जल संसाधनों का संरक्षण
ग्रामीण क्षेत्रों में जल की उपलब्धता कृषि और आजीविका का आधार है। NREGA के तहत बनाए गए तालाब, चेक-डैम और वर्षा जल संचयन संरचनाएँ भूजल स्तर बढ़ाने में सहायक होती हैं। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होती है और किसानों की आय में सुधार होता है।
ग्रामीण सड़कों का निर्माण
गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ना विकास की पहली सीढ़ी है। NREGA के माध्यम से कच्ची एवं पक्की सड़कों का निर्माण किया गया, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंच आसान हुई। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिली।
कृषि उत्पादकता में वृद्धि
भूमि समतलीकरण, मेड़बंदी और सिंचाई संरचनाओं के निर्माण से कृषि योग्य भूमि का बेहतर उपयोग संभव हुआ है। इससे फसल उत्पादन और किसानों की आमदनी में वृद्धि देखी गई है।
सामाजिक समावेशन और महिला सशक्तिकरण
NREGA में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएँ इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं। इससे परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
NREGA ने ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी पलायन को कम करने में मदद की है। स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध होने से लोगों को शहरों की ओर पलायन करने की आवश्यकता कम हुई है। साथ ही, योजना के तहत निर्मित परिसंपत्तियाँ दीर्घकालिक विकास का आधार बन रही हैं।
इसके अतिरिक्त, ग्राम पंचायतों की भूमिका मजबूत हुई है, जिससे स्थानीय स्वशासन को बढ़ावा मिला है। पारदर्शिता और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) जैसी व्यवस्थाओं ने जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद की है।
हालांकि NREGA ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं, फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं इन चुनौतियों का समाधान प्रभावी निगरानी, डिजिटल भुगतान प्रणाली और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाकर किया जा सकता है। यदि NREGA को तकनीकी नवाचारों, जलवायु अनुकूल परियोजनाओं और कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ा जाए, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और सशक्त बना सकता है। जल संरक्षण, हरित ऊर्जा और सतत विकास लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाकर इसे और प्रभावी बनाया जा सकता है।
FAQs
निष्कर्ष
NREGA ने ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अवसंरचना को मजबूत करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और सामाजिक समावेशन को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है। इससे ग्रामीण समाज में आत्मनिर्भरता और स्थायित्व की भावना विकसित हुई है।
आगे बढ़ते हुए, आवश्यकता है कि इस योजना को पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक भागीदारी के साथ और अधिक प्रभावी बनाया जाए। यदि सही दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएँ, तो NREGA ग्रामीण भारत के सतत और समावेशी विकास का मजबूत आधार सिद्ध हो सकती है।