महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम NREGA
NREGA Job Card राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम NREGA राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम NREGA बेरोजगारी और गरीबी लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। विशेषकर सूखा, अकाल और कृषि पर निर्भरता के कारण लाखों ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार नहीं मिल पाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) पारित किया। बाद में वर्ष 2009 में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) कर दिया गया।
यह अधिनियम केवल एक योजना नहीं, बल्कि एक कानूनी अधिकार है, जो ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी देता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा प्रदान करना और आर्थिक असमानता को कम करना था।
NREGA की शुरुआत कैसे
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम NREGA दशक और शुरुआती 2000 के दशक में देश के कई हिस्सों में सूखा और कृषि संकट की स्थिति बनी। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बढ़ रही थी और लोग काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे थे। उस समय रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कुछ अस्थायी योजनाएँ चलाई गईं, लेकिन वे स्थायी समाधान नहीं दे पाईं।
इसी पृष्ठभूमि में वर्ष 2004 में नई सरकार ने अपने साझा न्यूनतम कार्यक्रम (Common Minimum Programme) में ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून लाने का वादा किया। इसके बाद संसद में विधेयक प्रस्तुत किया गया और 7 सितंबर 2005 को इसे पारित कर दिया गया। 2 फरवरी 2006 से यह अधिनियम 200 जिलों में लागू हुआ। बाद में 2008 तक इसे पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में विस्तारित कर दिया गया।

NREGA से MGNREGA तक
शुरुआत में इसे राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) कहा जाता था। वर्ष 2009 में महात्मा गांधी की 140वीं जयंती के अवसर पर इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) रखा गया। इसका उद्देश्य गांधीजी के ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के विचारों को साकार करना था।
योजना की ऐतिहासिक विशेषताएँ
1. रोजगार का कानूनी अधिकार
यह भारत का पहला कानून है जो ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी देता है।
2. चरणबद्ध विस्तार
2006 में 200 जिलों से शुरुआत हुई, 2007 में 130 और जिलों को जोड़ा गया, और 2008 तक इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया।
3. सामाजिक अंकेक्षण Social Audit
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक अंकेक्षण की व्यवस्था की गई, जिससे ग्राम सभा के माध्यम से कार्यों की समीक्षा हो सके।
4. महिलाओं की भागीदारी
योजना में कम से कम 33% महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य की गई, जो ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।
NREGA का ऐतिहासिक महत्व
- ग्रामीण गरीबों को रोजगार की सुरक्षा मिली।
- पलायन में कमी आई।
- जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास हुआ।
- महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ी।
- सामाजिक समानता को बढ़ावा मिला।
यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रोजगार योजनाओं में से एक मानी जाती है।
प्रमुख कार्य और विकास
NREGA के अंतर्गत जल संरक्षण, तालाब निर्माण, सड़क निर्माण, वृक्षारोपण, भूमि सुधार और सिंचाई परियोजनाओं जैसे कार्य किए गए। इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ और कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ।
चुनौतियाँ और सुधार
हालांकि योजना ऐतिहासिक रही है, लेकिन इसे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा:
- मजदूरी भुगतान में देरी
- भ्रष्टाचार की शिकायतें
- प्रशासनिक जटिलताएँ
- जागरूकता की कमी
इन समस्याओं को दूर करने के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली, आधार-आधारित सत्यापन और ऑनलाइन मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएँ लागू की गईं।
FAQs
निष्कर्ष
NREGA की शुरुआत भारत के ग्रामीण इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। इस योजना ने लाखों ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की। रोजगार का कानूनी अधिकार देकर सरकार ने सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया।
समय के साथ योजना में सुधार और तकनीकी बदलाव किए गए हैं, जिससे इसकी पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ी है। NREGA का इतिहास यह दर्शाता है कि यदि सही नीति और प्रतिबद्धता हो, तो ग्रामीण विकास और गरीबी उन्मूलन की दिशा में बड़े बदला