NREGA Job Card  ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम NREGA ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी एक पुरानी और गंभीर समस्या रही है। कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, मौसमी काम, प्राकृतिक आपदाएँ और सीमित उद्योगों के कारण ग्रामीण परिवारों को पूरे वर्ष नियमित आय नहीं मिल पाती। इसी चुनौती का समाधान करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA) लागू किया गया। यह अधिनियम ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार देकर बेरोजगारी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

NREGA केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि एक कानूनी अधिकार है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के वयस्क सदस्य, जो अकुशल श्रम करने को तैयार हैं, वे काम मांग सकते हैं और सरकार 15 दिनों के भीतर उन्हें रोजगार देने के लिए बाध्य है। यही व्यवस्था ग्रामीण बेरोजगारी को कम करने का आधार बनती है।

रोजगार की कानूनी गारंटी

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम NREGA ग्रामीण परिवारों को 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार प्रदान करता है। यह कानूनी प्रावधान सुनिश्चित करता है कि यदि काम के लिए आवेदन किया जाए, तो निश्चित समय सीमा के भीतर काम मिलना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता, तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान है। इससे श्रमिकों को सुरक्षा मिलती है और वे आय के अभाव में पूरी तरह असहाय नहीं होते।

मौसमी बेरोजगारी का समाधान

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य साल के कुछ महीनों तक ही उपलब्ध रहता है। बाकी समय लोग बेरोजगार रहते हैं। NREGA इस अंतराल को भरने का कार्य करता है। जब खेती का काम नहीं होता, तब श्रमिक मनरेगा के तहत जल संरक्षण, सड़क निर्माण, तालाब खुदाई जैसे कार्यों में रोजगार पा सकते हैं। इससे सालभर आय का स्रोत बना रहता है।

3. स्थानीय स्तर पर रोजगार

NREGA के अंतर्गत कार्य गांव या उसके आसपास ही दिए जाते हैं। इससे श्रमिकों को शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ता। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से परिवार एकजुट रहते हैं और ग्रामीण समाज की स्थिरता बनी रहती है।

4. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति

जब श्रमिकों को नियमित मजदूरी मिलती है, तो वे अपनी आय स्थानीय बाजारों में खर्च करते हैं। इससे छोटे दुकानदारों, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं को भी लाभ मिलता है। इस प्रकार NREGA केवल व्यक्तिगत बेरोजगारी कम नहीं करता, बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र को सशक्त बनाता है।

5. महिलाओं की भागीदारी

NREGA में कम से कम 33% भागीदारी महिलाओं की अनिवार्य की गई है। इससे ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिलते हैं। आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएँ परिवार की आय बढ़ाने में योगदान देती हैं, जिससे गरीबी और बेरोजगारी दोनों में कमी आती है।

6. स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण

मनरेगा के तहत जल संरक्षण, वृक्षारोपण, सड़क निर्माण और भूमि सुधार जैसे कार्य किए जाते हैं। इनसे कृषि उत्पादकता बढ़ती है और भविष्य में रोजगार के और अवसर पैदा होते हैं। इस प्रकार यह योजना अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर बेरोजगारी कम करती है।

7. सामाजिक सुरक्षा और समानता

यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य कमजोर वर्गों को रोजगार के समान अवसर प्रदान करती है। इससे समाज के वंचित वर्गों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है और सामाजिक असमानता कम होती है।

चुनौतियाँ

  • मजदूरी भुगतान में देरी
  • कार्यों की सीमित उपलब्धता
  • प्रशासनिक बाधाएँ
  • जागरूकता की कमी

FAQs

उत्तर: यह योजना ग्रामीण परिवारों को प्रति वर्ष 100 दिनों का गारंटीकृत रोजगार देकर बेरोजगारी कम करती है।

उत्तर: योजना के तहत 100 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाता है, जो कृषि के ऑफ-सीजन में विशेष रूप से मददगार होता है।

उत्तर: हाँ, योजना में कम से कम 33% महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है।

उत्तर: 15 दिनों के भीतर काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाता है।

निष्कर्ष


NREGA ग्रामीण भारत में बेरोजगारी कम करने का एक प्रभावी और ऐतिहासिक कदम है। 100 दिनों के गारंटीकृत रोजगार की व्यवस्था ने लाखों परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया है। यह योजना ग्रामीण समाज को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

यदि योजना का क्रियान्वयन पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होता रहे, तो यह ग्रामीण बेरोजगारी को और अधिक कम कर सकती है। NREGA केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, सामाजिक समानता और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार है।

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